फिल्म बबलू बैचलर : परफेक्ट मैच की तलाश के दौरान कॉमेडी

फ़िल्म बबलू बैचलर : परफेक्ट मैच की तलाश के दौरान कॉमेडी

कलाकार: शरमन जोशी, पूजा चोपड़ा, तेजश्री प्रधान, राजेश शर्मा
निर्देशक: अग्निदेव चटर्जी
निर्माता: अजय रजवानी
रेटिंग: 3 स्टार्स

परफेक्ट मैच की तलाश के दौरान प्यार, इमोशंस और कॉमेडी को दर्शाती फ़िल्म बबलू बैचलर एक बार देखने वाला सिनेमा है। कोरोना वायरस की महामारी की दूसरी लहर के बाद महाराष्ट्र में सिनेमाघरों के दोबारा खुलने के बाद बबलू बैचलर रिलीज होने वाली पहली बड़ी फिल्मों में से एक है। शरमन जोशी, पूजा चोपड़ा, तेजश्री प्रधान, राजेश शर्मा के अभिनय से सजी बबलू बैचलर एक हल्की-फुल्की कॉमेडी है, जिसमें रोमांस का तड़का भी है। रफत फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म बबलू बैचलर (शरमन जोशी) की उस खोज के बारे में है, जिसमें वह एक आदर्श दुल्हन की तलाश में निकल पड़ा है।

इसकी कहानी उत्तर प्रदेश में बेस्ड है। शरमन जोशी ने बबलू का रोल किया है जो एक संपन्न परिवार का इकलौता लड़का है। वह 35 साल का है और अभी भी बैचलर है। उसके घरवाले उसकी शादी का सपना देखते रहते हैं। बबलू एक आइडियल दुल्हन की तलाश में कुछ लड़कियों से मिलता है लेकिन उसे सही लड़की नहीं मिली। फिर, बबलू की मुलाकात अवंतिका से होती है, अवंतिका का रोल पूजा चोपड़ा ने निभाया है।अवंतिका काफी खुले निज़ाज की लड़की है और अपने अतीत के बारे में खुल कर बात करती है। वह बबलू को साफ साफ बताती है कि उसके पाँच बॉयफ्रेंड रह चुके हैं। शुरुआत में, यह जानकर बबलू हिचकिचाता है लेकिन बाद में उससे प्यार करने लगता है। बबलू का जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है और वह यही सोचता है कि उसके पिता ने उसके लिए काफी कुछ किया है। जबकि अवंतिका की सोच अलग है उसको एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जिसकी जिंदगी में कोई लक्ष्य हो। इसलिए वह बबलू से इस शादी को रद्द करने का अनुरोध करती है।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब इसके बाद बबलू अपनी मौसी की बेटी की शादी में जाता है। वहां उनकी मुलाकात तेजश्री प्रधान द्वारा अभिनीत स्वाति से होती है। स्वाति फ़िल्म अभिनेत्री बनना चाहती है। वे दोनों एक दूसरे के करीब आते हैं, और स्वाति बबलू को प्रपोज करती है। वे दोनों शादी कर लेते हैं। स्टोरी में फिर मोड़ आता है जब अपनी सुहागरात वाले दिन स्वाति भाग जाती है। वह बबलू के लिए एक मैसेज छोड़ती है कि उसे अभिनेत्री बनने का मौका मिला है और इसलिए वह मुंबई चली गई। बबलू स्वाति को खोजने मुंबई जाता है। मुंबई में उसकी मुलाकात अवंतिका से होती है। वह स्वाति से मिलने में उसकी मदद करती है। उसकी इस कोशिश को देखकर बबलू अवंतिका को पसंद करने लगता है। अब बबलू क्या करेगा? क्या वह स्वाति को वापस लाएगा, या वह अवंतिका के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करेगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

शरमन जोशी ने बबलू के किरदार को बखूबी जिया है, कई प्रकार के इमोशंस को उन्होंने बखूबी पेश किया है। दोनों अभिनेत्रियों पूजा चोपड़ा और तेजश्री प्रधान ने बेहतर अदाकारी की है। पूजा चोपड़ा ने अपनी भूमिका से इंसाफ किया है। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन, डायलॉग डिलीवरी का ढंग कमाल का है। जीत गांगुली द्वारा संगीतबद्ध गाने मधुर हैं।

यह एक कॉमेडी फिल्म जरूर है मगर इसमें इमोशंस भी बहुत है। फ़िल्म की कहानी छोटे शहर के आम लोगों की है इसलिए इससे दर्शक तुरंत कनेक्ट भी हो जाएँगे। इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म का ताना बाना बेहद दिलचस्प ढंग से बुना गया है जिसमें कई टर्न और ट्विस्ट हैं जो दिल को छु लेते हैं। इसमें सिचुएशनल कॉमेडी का रंग नजर आता है।

आज के हालात में परफेक्ट लड़का या लड़की की तलाश में लोग वर्षों लगे रहते हैं। काफी उम्र भी निकल जाती है। बबलू के किरदार के जरिये यही दिखाया गया है कि परफेक्ट मैच की तलाश के चक्कर मे अक्सर हाथ से वक्त निकल जाता है।
फिल्म में ड्रामा, इमोशन, रोमांस और कॉमेडी का शानदार मिश्रण है। बबलू बैचलर फ़िल्म का शौक रखने वालों के लिए एक अच्छा सिनेमा है।

About गाज़ी मोईन

गाजी मोईन मुंबई में काफ़ी समय से फ़िल्मी दुनिया में बतौर गीतकार, राईटर और फ़िल्म जर्नलिस्ट एक्टिव हैं। वह कवि भी हैं और आप मुंबई सहित देश भर के कई कवि सम्मेलनों और मुशायरों में अपनी शायरी पेश करते आए हैं। ऑल इंडिया रेडियो मुम्बई पर नियमित रूप से वह अपनी रचनाएं पेश करते आए हैं। म्यूज़िक एलबम "तू ही तो था" और "शब" के लिए लिखे हुए उनके गीत काफी मक़बूल हुए हैं। सिंगर रूप कुमार राठौड़ और ग़ज़ल सिंगर सोनाली राठौड़ की आवाज़ में उनके गीत और ग़ज़लें रिकॉर्ड हैं जिन्हें रेडियो मिर्ची से प्रसारित किया गया। गाज़ी मोईन ने दूरदर्शन के कई सीरियल्स लिखे हैं, कई म्यूज़िक चैनल से जुड़े रहे हैं और फ्रीलांसर के रूप में कई अख़बारों, मैगज़ीन के लिए लिखते रहे हैं। गाज़ी मोईन मुंबई में द इंडियन परफॉर्मिंग राईट सोसाइटी लिमिटेड के मेंबर भी हैं। गाज़ी मोईन को उनके योगदान के लिए "सिनेमा आजतक अचीवमेंट अवॉर्ड" सहित कई पुरूस्कार और सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। इनकी 2 पुस्तकें पब्लिश हो चुकी हैं।

View all posts by गाज़ी मोईन →

Leave a Reply